शिमला: जिला शिमला की राजनीति में इस बार पंचायत चुनावों ने बड़ा बदलाव हुआ है। लंबे समय से कांग्रेस के प्रभाव वाले जिला परिषद में पहली बार भाजपा को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने की मजबूत उम्मीद नजर आ रही है। जिला परिषद के 25 वार्डों के चुनाव परिणामों ने ऐसा सियासी समीकरण बनाया है, जिसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की चाबी अब निर्दलीय सदस्यों के हाथों में आ गई है। इस बार जिला परिषद चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 सीटों पर जीत दर्ज की है। पिछले चुनाव में भाजपा केवल चार सीटों तक सिमट गई थी, लेकिन इस बार पार्टी ने सीधे 11 सीटों तक पहुंचकर अपनी ताकत लगभग तीन गुना बढ़ा ली है। दूसरी ओर कांग्रेस को नौ सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है, जबकि पांच सीटों पर निर्दलीय विजयी हुए हैं। जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में जीत के लिए 13 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार भाजपा बहुमत से केवल दो कदम दूर है, जबकि कांग्रेस को अध्यक्ष पद तक पहुंचने के लिए चार अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में दोनों दलों की नजरें अब निर्दलीय सदस्यों पर टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पांच निर्दलीय सदस्यों में से एक कांग्रेस समर्थक माना जा रहा है, जबकि दो सदस्यों को भाजपा समर्थक माना जा रहा है। शेष दो निर्दलीय सदस्य फिलहाल किसी भी दल के साथ खुलकर नहीं जुड़े हैं। यही कारण है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का पूरा गणित इन दो सदस्यों के रुख पर निर्भर करता दिखाई दे रहा है। यदि भाजपा समर्थक माने जा रहे निर्दलीय सदस्य पार्टी के साथ आते हैं तो भाजपा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद तक पहुंचने का रास्ता आसान हो सकता है।
भाजपा कुर्सी से दो कदम दूर, आजाद पर टिकी निगाहें
जिला शिमला में अब तक जिला परिषद की सत्ता पर कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। पंचायत से लेकर विधानसभा चुनावों तक अधिकांश क्षेत्रों में कांग्रेस का प्रभाव है। यही वजह रही कि जिला परिषद में भी भाजपा कभी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद तक नहीं पहुंच पाई। लेकिन इस बार के चुनाव परिणामों ने राजनीतिक तस्वीर बदल दी है और पहली बार भाजपा जिला परिषद की सत्ता के बेहद करीब दिखाई दे रही है। हालांकि कांग्रेस की प्रतिष्ठा पूरी तरह नहीं गिरी है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र ने कांग्रेस की लाज बचाई है। यहां जिला परिषद के चारों वार्ड कांग्रेस के खाते में गए हैं। कांग्रेस विधायक मोहन लाल ब्राक्टा के रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। यहां चार में से केवल एक सीट कांग्रेस को मिली, जबकि तीन वार्डों में भाजपा ने जीत दर्ज की। अब सभी की निगाहें जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में निर्दलीय की भूमिका ही तय करेगी कि जिला शिमला में जिला परिषद की सत्ता पर कांग्रेस का वर्चस्व बरकरार रहेगा या फिर भाजपा पहली बार इतिहास रचते हुए अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचेगी।