दवाइयों की अवैध फैक्टरी पर छापा, लाइसेंस रद्द होने के बाद भी बन रही थीं दवाएं

देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ ने ‘ऑपरेशन फेक पिल’ के तहत कोटद्वार में संचालित एक अवैध दवा फैक्टरी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया। जांच में सामने आया कि फैक्टरी का लाइसेंस वर्ष 2024 में ही निरस्त किया जा चुका था, इसके बावजूद यहां दवाओं का निर्माण कार्य जारी था।

एसटीएफ को हाल ही में जीवन रक्षक दवाओं की नकली कॉपी बनाकर ऑनलाइन बेचने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह के दो सदस्यों की गिरफ्तारी के दौरान इस फैक्टरी के बारे में अहम जानकारी मिली थी। जांच के आधार पर एसटीएफ, औषधि विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने कोटद्वार के सिडकुल सिगड्डी क्षेत्र स्थित मैसर्स नैक्टर हर्ब्स एंड ड्रग्स फैक्टरी में छापेमारी की।

निरीक्षण के दौरान टीम को फैक्टरी परिसर में दवा निर्माण से जुड़ी मशीनें और उपकरण मिले। मौके से करीब तीन किलोग्राम कम्प्रेस्ड टैबलेट और टैबलेट बनाने में इस्तेमाल होने वाले 34 पंच उपकरण बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 तथा फैक्टरी संचालन से जुड़े कई नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई है।

कार्रवाई के बाद फैक्टरी को सील कर बरामद सामग्री को कब्जे में ले लिया गया। एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि यह वही फैक्टरी है, जिस पर वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के आरोप लगे थे। इसके अलावा वर्ष 2024 में तेलंगाना पुलिस ने भी यहां छापेमारी कर नकली दवाइयों का बड़ा जखीरा और भारी मात्रा में रैपर बरामद किए थे।

एसटीएफ ने कहा कि नकली दवाओं के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और मामले की गहन जांच की जा रही है।