भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को नई रफ्तार, निवेश से रक्षा-परमाणु ऊर्जा तक बढ़ेगा सहयोग

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाई पार्मेलिन की बातचीत में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के कई बड़े फैसले हुए हैं। अब रिश्ते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेंगे। निवेश, निर्यात, रक्षा, परमाणु ऊर्जा और बुनियादी ढांचे में साथ काम बढ़ाया जाएगा। स्विट्जरलैंड में भारतीय सामान की बिक्री बढ़ाने और वहां से ज्यादा निवेश भारत लाने पर सहमति बनी है। वर्तमान में इंजीनियरिंग, सेवा, रसायन और दवा जैसे क्षेत्रों में 330 से अधिक स्विस कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, जबकि स्विट्जरलैंड में सूचना प्रौद्योगिकी, दवा और मशीनरी जैसे सेक्टरों में भारतीय कंपनियां मौजूद हैं। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के देशों-आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) के अक्तूबर में लागू होने से दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश के रिश्तों को और बढ़ावा मिला है। पीएम मोदी ने कहा कि टीईपीए निवेश, नवाचार, रोजगार और साझा समृद्धि के लिए एक महत्त्वाकांक्षी खाका है।

इसके माध्यम से, हम अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमरीकी डालर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अपने लक्ष्यों को साकार करेंगे। प्रधानमंत्री ने नवाचार, बुनियादी ढांचे और उन्नत प्रौद्योगिकी को भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी के मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि दोनों पक्ष सहभागिता को नई गति देने जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि हमने स्विट्जरलैंड में भारतीय निर्यात के लिए बाजार तक पहुंच का विस्तार करने और दोनों देशों के बीच निवेश को और सुगम बनाने के लिए कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इससे स्विट्जरलैंड को भारत के कृषि, दवा, वस्त्र और इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि होगी। पीएम ने कहा कि हम स्विस बुनियादी ढांचा कंपनियों को भारत में बड़े पैमाने पर निवेश करने और क्षमता निर्माण, डिजाइन तथा विनिर्माण में भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हैं।