चम्पावत। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम, देवीधुरा में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। आस्था, परंपरा, लोक संस्कृति और उत्साह से सराबोर इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। चार खाम–सात थोक के बीच होने वाली प्राचीन पाषाण युद्ध की अनूठी परंपरा ने एक बार फिर सभी का ध्यान आकर्षित किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी देवीधुरा पहुंचकर बग्वाल मेले में प्रतिभाग किया। देवीधुरा हेलीपैड पर पारंपरिक लोकनृत्य छोलिया की मनमोहक प्रस्तुति के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ माँ वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माँ वाराही मइया सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।
‘बग्वाल उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का प्रतीक’
मुख्यमंत्री धामी ने देवीधुरा की पावन भूमि और विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बग्वाल मेले को उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विकास को केवल सड़क, भवन और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी उद्देश्य से ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के तहत कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक और धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में क्षेत्र में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण से जुड़े 397 कार्यों पर 68.58 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
देवीधुरा बनेगा नगर पंचायत, 9.80 करोड़ से बनेगी मल्टी लेवल पार्किंग
मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत बनाए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण शीघ्र कराया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों, विशेषकर युवा पीढ़ी से अपनी समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।
चार खामों के बग्वालियों ने निभाई सदियों पुरानी परंपरा
मुख्यमंत्री ने चार खाम–सात थोक के बीच खेले जाने वाले अनोखे प्राचीन पाषाण युद्ध का भी अवलोकन किया। माँ वाराही मंदिर में प्रधान पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बग्वाल की शुरुआत हुई। इसके बाद चारों खामों—वालिक (सफेद), चम्याल (गुलाबी), गहड़वाल (भगवा) और लमगड़िया (पीला)—के बग्वालियों ने मैदान में प्रवेश किया। पारंपरिक रंग-बिरंगे परिधानों और पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और माँ वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल का शुभारंभ हुआ। फलों और फूलों की बरसात के बीच पूरा बग्वाल मैदान ‘माँ वाराही मइया की जय’ के जयकारों से गूंज उठा।
महिलाओं और बालिकाओं ने मुख्यमंत्री को बांधी राखी
रक्षाबंधन के अवसर पर मेले में बालिकाओं और महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधकर पर्व की खुशियां साझा कीं। मुख्यमंत्री ने भी सभी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ वाराही मइया सभी की चिंता करती हैं। देवीधुरा की बग्वाल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अनूठी सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा दुनिया में अपनी तरह की अनोखी है और देवीधुरा के बग्वाल मैदान में ही देखने को मिलती है। बग्वाल की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनुशासन और भाईचारा है, जहां परंपरा के निर्वहन के बाद सभी योद्धा एक-दूसरे से गले मिलते हैं और सौहार्द का संदेश देते हैं।