स्वास्थ्य: सोते समय अचानक नींद खुलना, लेकिन शरीर का हिल-डुल न पाना – यह अनुभव डरावना हो सकता है, और इसे ही स्लीप पैरेलिसिस या निद्रा पक्षाघात कहते हैं. यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ व्यक्ति पूरी तरह से जागृत होता है, लेकिन अस्थायी रूप से बोलने या हिलने-डुलने में असमर्थ होता है. यह अक्सर नींद से जागते समय या नींद में जाते समय होता है। हालांकि यह आमतौर पर हानिरहित होता है, इसके लक्षण काफी परेशान करने वाले हो सकते हैं|
स्लीप पैरेलिसिस क्या है: स्लीप पैरेलिसिस तब होता है जब आपका दिमाग जाग जाता है लेकिन शरीर के मांसपेशी नियंत्रण की प्रक्रिया (जिसे एटोनिया कहते हैं) अभी भी सक्रिय होती है. सामान्य नींद के चक्र के दौरान, REM (रैपिड आई मूवमेंट) अवस्था में मांसपेशियां अस्थायी रूप से लकवाग्रस्त हो जाती हैं ताकि हम अपने सपनों को न खेल सकें. स्लीप पैरेलिसिस के दौरान, यह एटोनिया जागृति के साथ ओवरलैप हो जाता है, जिससे आप जागृत महसूस करते हुए भी हिल नहीं पाते. यह कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रह सकता है|
स्लीप पैरेलिसिस के सामान्य लक्षण: शरीर को हिलाने या बोलने में असमर्थता: यह सबसे प्रमुख और परिभाषित लक्षण है. आप महसूस कर सकते हैं कि आप चिल्लाना चाहते हैं या हिलना चाहते हैं, लेकिन शरीर प्रतिक्रिया नहीं देता. यह स्थिति काफी भयभीत करने वाली हो सकती है| सांस लेने में कठिनाई या छाती पर दबाव: कुछ लोगों को लगता है कि उनकी छाती पर भारी चीज़ रखी है या वे ठीक से सांस नहीं ले पा रहे हैं. यह घबराहट को और बढ़ा सकता है, हालांकि वास्तव में आपकी श्वास प्रक्रिया अप्रभावित रहती है.
यदि स्लीप पैरेलिसिस के एपिसोड बार-बार होते हैं, नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं, या आपको दिन में अत्यधिक नींद आती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है. यह नार्कोलेप्सी जैसे अंतर्निहित नींद विकारों का संकेत भी हो सकता है. डॉक्टर आपके लक्षणों का मूल्यांकन कर सकते हैं और उचित निदान और उपचार की सलाह दे सकते हैं|
