बिहार में ‘डॉग बाबू’ को मिला सरकारी निवास प्रमाण पत्र, 2 मिनट में रद्द; राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप, प्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

बिहार: ‘डॉग बाबू’ नामक कुत्ते को सरकारी निवास प्रमाण पत्र जारी होने की घटना ने एक बड़ा राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है। यह घटना बिहार में सुशासन और सरकारी प्रणालियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठा रही है।

क्या है पूरा मामला?

  • ‘डॉग बाबू’ को मिला निवास प्रमाण पत्र: बिहार के पटना जिले के मसौढ़ी में “डॉग बाबू” नाम के एक कुत्ते को सरकारी आरटीपीएस (Right to Public Service) पोर्टल के माध्यम से निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।
  • अजीबोगरीब जानकारी: इस प्रमाण पत्र पर एक कुत्ते की तस्वीर लगी थी, और उसमें पिता का नाम “कुत्ता बाबू” और माता का नाम “कुतिया देवी” लिखा गया था। पता मसौढ़ी नगर परिषद के कौलीचक मोहल्ले का था। राजस्व अधिकारी मुरारी चौहान के डिजिटल हस्ताक्षर भी इस पर मौजूद थे।
  • जल्दबाजी में रद्द: यह प्रमाण पत्र 24 जुलाई 2025 को शाम 3:56 बजे जारी किया गया था और सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, इसे तुरंत 3:58 बजे, यानी दो मिनट के भीतर रद्द कर दिया गया।

क्यों हुआ राजनीतिक बवाल?

  • चुनाव आयोग के विशेष अभियान पर सवाल: यह घटना तब सामने आई है जब बिहार में चुनाव आयोग का मतदाता सूची संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) अभियान चल रहा था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि एक तरफ आम नागरिकों के आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे वैध दस्तावेजों को मतदाता सूची में संशोधन के दौरान खारिज किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक कुत्ते को निवास प्रमाण पत्र मिल रहा है।
  • प्रशासनिक लापरवाही: इस घटना ने सरकारी ऑनलाइन प्रणाली में खामियों और अधिकारियों की लापरवाही को उजागर किया है। सवाल उठ रहे हैं कि बिना उचित सत्यापन के ऐसा संवेदनशील दस्तावेज कैसे जारी हो गया।
  • विपक्ष का हमला: स्वराज पार्टी के नेता योगेंद्र यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस घटना को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे “प्रणाली की विफलता” और “जनता के साथ धोखा” बताया है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी तंज कसा कि बिहार में बिना रिश्वत के कुछ नहीं होता, शायद कुत्ते ने भी रिश्वत दी होगी।
  • साइबर पुलिस जांच में जुटी: पटना के जिलाधिकारी ने इस घटना को “बहुत गंभीर” बताया है और इसमें शामिल “शरारती तत्वों” के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। साइबर पुलिस स्टेशन को इस मामले की जांच करने और दोषियों का पता लगाने का काम सौंपा गया है।
  • अधिकारियों पर कार्रवाई: प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आवेदन में दूसरों के आधार कार्ड और पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया था। इस मामले में एक सर्कल कार्यालय के कर्मचारी (आईटी सहायक) को गिरफ्तार किया गया है, और राजस्व अधिकारी व अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
  • नवादा में भी ऐसा ही मामला: इस घटना के बाद नवादा जिले से भी “डोगेश बाबू” नाम के एक कुत्ते के आवासीय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन का एक समान मामला सामने आया है, जिस पर नवादा के डीएम ने भी जांच और एफआईआर के आदेश दिए हैं।

यह घटना बिहार में प्रशासनिक पारदर्शिता और ऑनलाइन सेवाओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है, और राजनीतिक गलियारों में इसकी तीखी आलोचना हो रही है।