देहरादून: उत्तराखंड शासन से दो अधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर नई जानकारी सामने आई है। एक तरफ मुख्यमंत्री सेटअप में एक अधिकारी की एंट्री की गई है तो दूसरी तरफ स्टडी लीव से वापस लौटने वाले अफसर ने भी शासन में जॉइनिंग दे दी है। हालांकि, उम्मीद लगाई जा रही है कि अभी कुछ पोस्टिंग को लेकर निर्णय होना बाकी है, जिसपर जल्द आदेश जारी होने की संभावना है।
उत्तराखंड में भले ही फिलहाल पंचायत चुनाव को लेकर आचार संहिता प्रभावी हो लेकिन अफसरो की तैनाती को लेकर कयासबाजी कम नहीं हुई है। वैसे मुख्यमंत्री धामी अधिकारियों को जिम्मेदारी देने के मामले में सभी को चौंकाते रहे हैं। काफी इंतजार कराने के बाद ही अधिकारियों की पोस्टिंग से जुड़े आदेश भी होते रहे हैं।
फील्ड पोस्टिंग देने पर होगा विचार: इसी कड़ी में 2014 बैच के आईएएस अधिकारी रोहित मीणा ने स्टडी लीव से वापसी करते हुए शासन में जॉइनिंग दे दी है। फिलहाल IAS रोहित मीणा कार्मिक में अटैच किए गए हैं। जल्द ही उन्हें फौरी तौर पर अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके बाद उन्हें फील्ड पोस्टिंग देने पर भी विचार हो रहा है।
दरअसल, रोहित मीणा ने अब तक किसी भी जिले में जिलाधिकारी के तौर पर काम नहीं किया है। यही नहीं जानकारी है कि वो किसी जिले में CDO भी नहीं रहे हैं। इस तरह पहले कुमाऊX मंडल विकास निगम और फिर सीधे एमडी इंडस्ट्री के तौर पर उन्होंने लंबे समय तक काम किया है। एक आईएएस अधिकारी के लिए जिलाधिकारी पद पर काम काफी अहम माना जाता है।
इन्हीं स्थितियों के चलते अब रोहित मीणा को किसी जिले की कमान सौंपने पर विचार चल रहा है। हाल ही में नितिका खंडेलवाल को टिहरी जिले में जिलाधिकारी बनाया गया है। नीतिका भी ऐसी ही IAS अधिकारी रही जिन्हें एक भी जिले की कमान नहीं मिल पाई थी, लेकिन इस बार सरकार ने उन्हें टिहरी जिले में बतौर DM की जिम्मेदारी दी है। ऐसे ही कुछ और IAS भी हैं जो अपनी जिले में DM के तौर पर पहली पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।
शासन में रोहित मीणा के अलावा दूसरी खबर आईएएस अधिकारी बंशीधर तिवारी को लेकर है। बंशीधर तिवारी को अब अपर सचिव मुख्यमंत्री बनाया गया है। उनके पास उपाध्यक्ष एमडीडीए, महानिदेशक सूचना की जिम्मेदारी है। फिलहाल मुख्यमंत्री सेटअप में भी कुछ बदलाव की उम्मीद है, जबकि हाल ही में बंशीधर तिवारी के अलावा आईएफएस अधिकारी पराग मधुकर धकाते को भी मुख्यमंत्री कार्यालय में जगह दी गई है। फिलहाल आचार संहिता लागू है। इसलिए शासन स्तर, या शहरी क्षेत्र में जिम्मेदारी बदलाव को लेकर कुछ आदेश संभव है।
