वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का दूसरा चरण शुरू किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार इस अभियान में ईरान के उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से गुजरने वाले जहाजों को धमकाने के लिए किया जा रहा था।
CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में बताया कि राष्ट्रपति के निर्देश पर दोपहर करीब तीन बजे हमलों का दूसरा चरण शुरू किया गया। बयान के अनुसार कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था, जो वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही के लिए खतरा मानी जा रही हैं।
अमेरिकी सेना के मुताबिक इससे पहले बुधवार सुबह भी करीब 90 मिनट तक चले अभियान में ईरान के तटीय रक्षा तंत्र और ग्रेटर टुंब द्वीप स्थित क्रूज मिसाइल भंडारण एवं लॉन्च साइटों पर सटीक हमले किए गए थे। CENTCOM का दावा है कि इन अभियानों से व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता और कमजोर हुई है।
हमलों के बाद ईरानी मीडिया ने दक्षिणी शहरों अहवाज और चाबहार में विस्फोटों की खबर दी। हालांकि, इन धमाकों का अमेरिकी हमलों से सीधा संबंध है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस बीच CENTCOM ने यह भी दावा किया कि ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध (नेवल ब्लॉकेड) को तोड़ने की कोशिश कर रहे दो वाणिज्यिक जहाजों को वापस मोड़ दिया गया। अमेरिकी सेना ने कहा कि वह प्रतिबंधों के प्रभावी क्रियान्वयन और क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
गौरतलब है कि एक दिन पहले अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों के आसपास नौसैनिक नाकाबंदी (नेवल ब्लॉकेड) फिर से लागू करने की घोषणा की थी। CENTCOM के अनुसार इस अभियान के तहत पूरे क्षेत्र में 20 से अधिक अमेरिकी युद्धपोतों और सैकड़ों सैन्य विमानों की तैनाती की गई है।
हालांकि, इन घटनाक्रमों पर ईरान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और अमेरिकी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।