नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार और पांच दिसंबर को भारत की यात्रा पर रहेंगे। यात्रा से पहले के्रमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भारत के साथ रूस के संबंधों की सराहना की है। पेस्कोव ने मंगलवार को कहा कि रूस आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत की मदद करेगा। पेस्कोव ने कहा कि हमारा मानना है कि आतंकवाद का मुकाबला करने का एक मात्र तरीका अंतरराष्ट्रीय सहयोग है। दुर्भाग्य से यूरोपीय देशों के साथ इस समय हमारे जिस प्रकार के रिश्ते हैं, वे हमारे लिए उस संभावना को सीमित करते हैं। भारत के साथ मिलकर हम आतंक के खिलाफ लड़ाई में सहयोग जारी रखेंगे। उनसे पूछा गया था कि यदि भारत आतंक के मुद्दे पर पाकिस्तान के खिलाफ फिर से कोई कार्रवाई करता है तो क्या रूस उसका समर्थन करेगा। रूसी अधिकारी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि आतंकवाद का कोई भी स्वरूप हो, उसका कोई भी स्रोत हो, उनका देश उसकी पुरजोर निंदा करता है। उन्होंने कहा कि हमारे देश ने आतंकवाद का दंश काफी झेला है और हम इसके दर्द को समझते हैं। हमें मालूम है कि भारत ने अनेक बार इस खतरे का सामना किया है।
रक्षा सहयोग पर डाला प्रकाश
क्रेमलिन प्रवक्ता ने भारत-रूस के बीच रक्षा सहयोग पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्षा उद्योग में हमारे सहयोग की बात करें तो प्रसिद्ध ब्रह्मोस मिसाइलों को याद करें। यह केवल उत्पादन या खरीद बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च तकनीकों का भी आदान-प्रदान है। निश्चित रूप से हमारे पास क्षमताएं हैं और हम भारत के साथ अपना अनुभव साझा करने के लिए तैयार हैं।
हिंदुस्तान के साथ खड़ा होना गर्व की बात
पेस्कोव ने कहा कि रूस को भारत के ऐतिहासिक विकास में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने पर गर्व है। रूस और भारत के बीच संबंध केवल डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल और व्यापार समझौता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उससे भी कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है। यही नहीं, टैरिफ को लेकर अधिकांश देशों को धमकाने वाले अमरीका को भी जवाब दिया है। दमित्री पेसकोव ने कहा कि रूस और भारत के द्विपक्षीय संबंध गहरी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। भारत और रूस वैश्विक मामलों में एक जैसा दृष्टिकोण रखते हैं। कानून के शासन पर अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर वैश्विक मामलों की प्रणाली और एक दूसरे के हितों को ध्यान में रखते हैं।
