हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में गूंजा रामचरितमानस का संदेश, मोरारी बापू बोले ‘मानस सिर्फ सिद्धांत नहीं, विज्ञान है’

नई दिल्ली: अमेरिका के प्रसिद्ध हार्वर्ड विश्वविद्यालय के सैंडर्स थिएटर मेमोरियल हॉल में पूज्य मोरारी बापू की नौ दिवसीय रामकथा के आठवें दिन अध्यात्म, गुरु महिमा और रामचरितमानस के व्यावहारिक दर्शन की प्रभावशाली प्रस्तुति हुई। कथा के दौरान तुलसी जन्मोत्सव का पावन पर्व भी श्रद्धापूर्वक मनाया गया।

कार्यक्रम में चित्रकूट के कामदगिरि परिक्रमा क्षेत्र से पधारे पूज्य महंत राम हृदय दास जी महाराज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान की कृपा का प्रसाद वहीं ठहरता है जहाँ भक्ति, प्रेम और गुरु-कृपा की गहराई होती है। बापू के वात्सल्य और प्रेम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “तुलसी जी को गर्व है कि राम उनके नायक हैं, राम को गर्व है कि तुलसी जैसा भक्त मिला और भारत माता को गर्व है कि बापू जैसा सुपुत्र मिला।”

कथा का शुभारंभ करते हुए मोरारी बापू ने पंडित रामकिंकर जी महाराज के विचारों का स्मरण किया और कहा कि गीता में जो योग है, रामचरितमानस में वही प्रयोग है। हार्वर्ड में ज्ञान की उपासना होती है और आज उस ज्ञान से मानस का विज्ञान मिलने आया है।

तकनीक और आधुनिकता के दौर पर विचार रखते हुए बापू ने कहा यदि AI हमारे दिल और दिमाग को नुकसान न पहुँचाए, तो यह स्वीकार्य है। जीवन में खुले मन से सबको सुनना चाहिए। कथा और साधना के लिए ताजगी और सादगी सबसे उपयोगी गुण हैं। अध्यात्म में ‘गुरु ही सबसे बड़ा प्रसाद’ है, जो साधक को हर प्रकार के संदेह और शंका से बाहर निकालकर ईश्वर की प्राप्ति कराता है।

कथा के दौरान बापू ने अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड और लंकाकांड के प्रमुख प्रसंगों—जैसे चित्रकूट मिलन, शबरी उद्धार, हनुमान-राम मैत्री और लंका दहन का मर्मस्पर्शी संक्षेप में वर्णन किया।