नॉन-फंक्शनल ग्रोथ सेंटर्स होंगे फिर से सक्रिय: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने दिए निर्देश

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश के विभिन्न विभागों के अंतर्गत संचालित ग्रोथ सेंटर्स की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने ग्रोथ सेंटर्स को स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए इनके नियमित मूल्यांकन और प्रभावी संचालन पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों से अपने-अपने ग्रोथ सेंटर्स की वर्तमान स्थिति और संचालित गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि बेहतर प्रदर्शन कर रहे ग्रोथ सेंटर्स को तकनीकी और अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए, जबकि निष्क्रिय (नॉन-फंक्शनल) ग्रोथ सेंटर्स को दोबारा संचालित करने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं।

उन्होंने कहा कि ग्रोथ सेंटर्स में तैयार होने वाले सभी उत्पादों को ट्रेसेबिलिटी, जीआई टैगिंग और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन से जोड़ा जाए, ताकि उनकी गुणवत्ता और बाजार में पहचान मजबूत हो सके।

मुख्य सचिव ने शीप एंड वूल डेवलपमेंट बोर्ड के अंतर्गत पशुपालकों की समस्याओं के समाधान के लिए नियमित संवाद और कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इससे पशुपालकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।

मुख्य सचिव ने ग्रोथ सेंटर्स को मजबूत मार्केट लिंकेज और कोल्ड स्टोरेज चेन से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए स्टैंड-अलोन माइक्रो स्टोरेज चेन विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और बाजार की मांग के अनुसार बेहतर मूल्य पर बिक्री संभव होगी।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि हाउस ऑफ हिमालयाज के साथ सभी संबंधित विभागों की समन्वय बैठक आयोजित की जाए। साथ ही, संभावनाशील लेकिन निष्क्रिय ग्रोथ सेंटर्स की हैंडहोल्डिंग कर उन्हें पुनः सक्रिय बनाया जाए। उन्होंने नाबार्ड से भी ग्रोथ सेंटर्स की जरूरतों और कमियों की पहचान कर आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने को कहा।

बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, एपीसीसीएफ नरेश कुमार, अपर सचिव कहकशां नसीम, आनन्द श्रीवास्तव, झरना कामठान सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।