देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने आज हैदराबाद स्थित कान्हा शांति वनम में एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम में भाग लिया। यह कार्यक्रम श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष, श्री रामचंद्र (बाबूजी) महाराज और संत तुकडोजी महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख व्यक्तित्वों में भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, पूज्य कमलेश डी पटेल (दाजी), विभिन्न संत, प्रबुद्धजन और देश-विदेश से आए साधक शामिल थे।
राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां ध्यान करने के दौरान उन्हें एक अद्भुत अनुभूति मिली। उन्होंने कान्हा शांति वनम को केवल एक आश्रम नहीं बल्कि वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बताया। यहां साधना, सेवा और समर्पण के माध्यम से मानवता के एकत्व का संदेश प्रसारित हो रहा है।
राज्यपाल ने “एक मानवता, एक हृदयः श्री गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएँ” विषय पर उद्बोधन दिया। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का जीवन और बलिदान मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता और सत्य के प्रति अडिगता का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने अपने प्राणों की आहुति देकर सिद्ध किया कि सच्चा धर्म वही है जो दूसरों के धर्म की रक्षा के लिए खड़ा हो।
राज्यपाल ने आगे कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान केवल ऐतिहासिक प्रसंग नहीं है, बल्कि आज के समय में भी यह जीवंत प्रेरणा के रूप में मौजूद है। वैश्विक स्तर पर जब असहिष्णुता और विभाजन जैसी चुनौतियाँ बढ़ रही हैं, उनकी शिक्षाएँ शांति, सहिष्णुता और मानवता का मार्ग दिखाती हैं।
राज्यपाल ने युवाओं से आग्रह किया कि वे ध्यान, आत्मचिंतन और सेवा के मार्ग को अपनाकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में ध्यान न केवल एकाग्रता बढ़ाता है, बल्कि व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में भी सहायक है।
