युद्ध का असर, भक्ति का संकल्प: कमर्शियल गैस न मिलने पर भक्तों ने लकड़ियों की आग पर पकाया प्रसाद

देहरादून। राजधानी के कांवली रोड स्थित शिव कॉलोनी के पास रामनवमी के अवसर पर भक्ति और दृढ़ संकल्प का एक ऐसा उदाहरण देखने को मिला, जिसने आधुनिक संसाधनों की कमी को बौना साबित कर दिया। वर्तमान में ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण देशभर में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत हो गई है, जिसका सीधा असर देहरादून के होटलों और ढाबों पर भी पड़ा है। लेकिन शिव कॉलोनी के भक्तों ने इस संकट के आगे घुटने टेकने के बजाय अपनी आस्था का मार्ग चुना।

जब गैस सप्लायरों ने हाथ खड़े कर दिए, तो सेवादारों ने अपनी पुरानी परंपराओं को याद किया और सड़क किनारे बड़ी-बड़ी लकड़ियों की भट्टियां सुलगा दीं। चिलचिलाती धूप और धधकती आग के बीच, भक्तों ने खौलते हुए तेल की कड़ाही में नंगे हाथों से पूड़ियाँ तलकर सबको हैरत में डाल दिया। यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं था, जहाँ एक ओर आग की तपन थी और दूसरी ओर ‘जय श्री राम’ के नारों के साथ अटूट सेवा का भाव।

इस भव्य आयोजन में पहले विधि-विधान से कन्या पूजन किया गया और फिर लकड़ियों की आग पर तैयार शुद्ध देसी घी का हलवा, पूरी और सब्जी का ‘अटूट भंडारा’ शुरू हुआ। हजारों की संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं ने इस प्रसाद को ग्रहण किया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गैस संकट ने उन्हें अपने पूर्वजों के दौर की याद दिला दी, जब संसाधनों की कमी के बावजूद सामूहिक शक्ति से बड़े से बड़े कार्य संपन्न हो जाते थे। कान्वाली रोड के इन भक्तों ने आज यह साबित कर दिया कि यदि मन में प्रभु के प्रति सच्ची श्रद्धा हो, तो कोई भी वैश्विक संकट या ईंधन की कमी सेवा के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण और लकड़ियों के धुएं के बीच महकते प्रसाद की खुशबू से सराबोर रहा, जो ‘संकल्प से सिद्धि’ की जीती-जागती मिसाल पेश कर रहा था।

शिव कॉलोनी, कांवली रोड, देहरादून।

गैस सिलेंडर की कमी के कारण लकड़ियों की पारंपरिक भट्टियों का उपयोग।

उबलते तेल में नंगे हाथों से सेवा करते सेवादार।

आस्था और एकता के आगे हर संकट छोटा है।”