तेहरान: अमरीका-इजरायल और ईरान जंग के 16वें दिन रविवार को संयुक्त अरब अमिरात (यूएई) के फुजैराह ऑयल टर्मिनल पर हुए हमले की चपेट में भारतीय झंडे वाला जहाज ‘जग लाडकी’ भी आ गया। भारतीय जहाज उस वक्त वहां तेल भरवा रहा था। भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक जहाज पर मौजूद सभी भारतीय स्टाफ सुरक्षित है। जहाज ने लगभग 80,800 मीट्रिक टन क्रूड ऑयल लोड किया और अब सुरक्षित रूप से भारत की ओर रवाना हो गया है। वहीं, ईरान ने रविवार को इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। मिसाइल के टुकड़े गिरने से उस इमारत को नुकसान पहुंचा है, जहां अमरीकी डिप्लोमेट काम करते हैं। हालांकि यह नहीं बताया गया कि यह इमारत किस शहर में है। इजरायल में अमरीका का दूतावास यरुशलम में है और तेल अवीव में भी उसका एक बड़ा दफ्तर है। इसी बीच, ईरान ने कहा है कि देश के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई पूरी तरह ठीक हैं और उन्हें कोई चोट नहीं लगी है। इससे पहले ब्रिटिश मीडिया ने दावा किया था कि मुजतबा 28 फरवरी को अमरीका-इजरायल के हमले में घायल हो गए थे। इसके बाद से वह कोमा में हैं और उनका एक पैर भी काटना पड़ा है। ईरान के सीनियर अधिकारी अली लरिजानी ने दावा किया है कि जेफ्री एपस्टीन से जुड़े कुछ लोग 2001 के 9/11 (वल्र्ड ट्रेड सेंटर) जैसा हमला करवाने की साजिश रच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इसका आरोप ईरान पर डालने की कोशिश की जा सकती है। ईरान ऐसे किसी आतंकी हमले का समर्थन नहीं करता और उसका अमरीकी जनता से कोई युद्ध नहीं है। उधर, इजरायल ने भी नेतन्याहू की हत्या की खबरों को खारिज किया। नेतन्याहू का 13 मार्च को एक वीडियो संदेश सामने आया था। इस वीडियो के एक फ्रेम में उनकी दाएं हाथ में छह अंगुलियां दिखाई देने का दावा किया गया। इसके बाद कुछ यूजर्स ने वीडियो को एआई या डीपफेक बताया था। लोगों का कहना था कि, यह असली नेतन्याहू नहीं हैं। इसके बाद दावा किया गया कि ईरान के हमले में नेतन्याहू की हत्या हो गई या वे जर्मनी भाग गए हैं, लेकिन इजराइली पीएम कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित हैं और ऐसी खबरें फेक न्यूज हैं। इसी बीच रविवार को नेतन्याहू का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह अपने हाथों की पांचों अंगुलियां दिखाते हुए कॉफी पी रहे थे। इस पर ईरान ने कहा कि नेतन्याहू बच्चों के कातिल हैं। यदि उनकी मौत नहीं हुई है, तो उनको ढूंढकर उनके किए की सजा दी जाएगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि मौजूदा युद्ध का अंत तभी संभव है, जब इस बात की पुख्ता गारंटी दी जाए कि हमले दोबारा नहीं दोहराए जाएंगे।
इसके साथ ही उन्होंने संघर्ष के दौरान हुए नुकसान के लिए हर्जाने या मुआवजे के भुगतान की मांग भी उठाई है। श्री अराघची ने क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाने का प्रस्ताव भी दिया है, जो क्षेत्र में हुए हमलों की बारीकी से जांच कर सके। ईरानी विदेश मंत्री ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि तेहरान की सैन्य कार्रवाइयां केवल इस क्षेत्र में स्थित अमरीकी ठिकानों और हितों तक ही सीमित रही हैं। उन्होंने इस बात का पुरजोर खंडन किया कि ईरान ने पड़ोसी देशों के किसी भी नागरिक या आवासीय क्षेत्र को निशाना बनाया है। श्री अराघची ने आशंका जताई कि अरब देशों के नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों के पीछे इजरायल का हाथ हो सकता है, जिसका उद्देश्य ईरान और उसके पड़ोसी अरब देशों के मधुर संबंधों में दरार पैदा करना है। श्री अराघची ने यह सनसनीखेज दावा भी किया कि अमरीका ने ईरान के ‘शाहिद’ की तरह ही ‘लुकास’ नामक एक नया ड्रोन बनाया है, जिसका उपयोग अरब देशों में ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया है।
