गैरसैंण। भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान वन विभाग से जुड़े मुद्दों पर जमकर चर्चा हुई। मानव-वन्य जीव संघर्ष, मुआवजा, रोपवे परियोजना और वन कानूनों को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों के विधायकों ने वन मंत्री सुबोध से तीखे सवाल किए।उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन भराड़ीसैंण में प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही वन विभाग से जुड़े मुद्दों पर
सदन में गरमागरम बहस देखने को मिली। अधिकांश सवाल वन मंत्री सुबोध उनियाल से पूछे गए, जिनमें मानव-वन्य जीव संघर्ष, फॉरेस्ट क्लीयरेंस, जंगली जानवरों से फसल नुकसान और रोपवे परियोजनाओं जैसे विषय शामिल रहे। सदन में पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों से कृषि को हो रहे नुकसान का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। विधायक खजान दास, महेश जीना और विनोद कंडारी ने इस विषय पर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की और कहा कि जंगली जानवरों से फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
वहीं वन (संरक्षण) अधिनियम और वनों से जुड़े स्थानीय लोगों के हक-हकूक को लेकर भी सदन में बहस हुई। इस दौरान भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने सरकार से पॉइंटेड सवाल पूछे. मंत्री की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विधानसभा अध्यक्ष को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।
स्पीकर ऋतु खंडूड़ी ने वन मंत्री से कहा कि यह प्रदेश के ज्वलंत मुद्दे हैं। इसलिए इन पर गंभीरता के साथ स्पष्ट जवाब दिया जाए। खास बात यह रही कि आज केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक खजान दास, विनोद चमोली और मुन्ना सिंह चौहान भी कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते नजर आए। सवालों की बौछार के बीच वन मंत्री सुबोध उनियाल को कई बार स्पष्टीकरण देना पड़ा, जिससे प्रश्नकाल के दौरान सदन का माहौल काफी गर्म रहा।
