धर्म-संस्कृति 05 फ़रवरी । रामायण एक पावन हिंदू धर्म ग्रंथ है. इसमें त्रेतायुग और भगवान राम की लीलाओं के बारे में बताया है. रमायण के कई अहम पात्रों के बारे में आज भी बात की जाती है. इन्हीं में शामिल हैं माता शबरी. माता शबरी श्री राम के प्रति अपनी अटूट आस्था और भक्ति के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने प्रभु की प्रतीक्षा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था. माता शबरी ने प्रभु को जूठे बेर खिलाए थे| भगवान ने बेर खाकर उनको परम धाम दिया था. हर साल साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को माता शबरी की जयंती मनाई जाती है. इस दिन विधि-विधान से प्रभु श्रीराम और माता शबरी की पूजा की जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2026 में शबरी जयंती कब मनाई जाएगी? साथ ही जानते हैं शबरी जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व|
शबरी जयंती कब है: पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 08 फरवरी को तड़के सुबह 02 बजकर 54 मिनट पर हो रही है. इस तिथि का समापन अगले दिन 09 फरवरी को प्रात: काल 05 बजकर 01 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में इस साल शबरी जयंती का पर्व 08 फरवरी 2026, रविवार के दिन ही मनाया जाएगा|
इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त 05 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त 06 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. दोपहर का अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. वहीं, अमृत काल दोपहर 02 बजकर 26 पर शुरू होगा. ये 03 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. इन समयों में की गई पूजा बड़ी लाभ देने वाली रहेगी|
शबरी जयंती पूजा विधि : शबरी जयंती पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. घर के मंदिर में राम दरबार और माता शबरी की तस्वीर रखें. पूजा के समय विशेष रूप से बेर का भोग लगाएं. क्योंकि यही माता शबरी की भक्ति का प्रतीक था| इसके साथ दीप, धूप और पुष्प अर्पित करें. रामायण के शबरी प्रसंग का पाठ करें. पूजा का समापन आरती के साथ करें. गरीबों और जरूरतमंदों को फल या अन्न दान करें. शबरी जयंती का महत्व: शबरी जयंती का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन भगवान राम की कृपा से माता शबरी को मोक्ष मिला था. शबरी जयंती का पर्व भक्ति और मोक्ष के प्रतीक के रूप में ही बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन सच्चे मन से भगवान राम और माता शबरी की पूजा करने पर प्रभु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. जीवन खुशहाल बना रहता है|
