बनबसा में जेंडर संवेदीकरण कार्यशाला, SHGs की सफलता बनी प्रेरणास्रोत

बनबसा (चम्पावत): एनएचपीसी सभागार, बनबसा (चम्पावत) में आज एक जेंडर संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) की बहनों के साथ गहन संवाद किया गया। इस दौरान महिलाओं के स्वरोज़गार की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों को नज़दीक से देखने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ।

हस्तशिल्प और नवाचारों की सराहना
कार्यशाला में उपस्थित प्रतिनिधियों ने महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे विविध हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों, और नवाचारों को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही सरिता देवी, शांति देवी, पूजा, कंचन और अन्य बहनों से व्यक्तिगत रूप से वार्ता की गई।

संवाद के दौरान यह ज्ञात हुआ कि ये महिलाएँ नमकीन निर्माण, डेयरी कार्य, सौंदर्य सेवाओं और वित्तीय सहयोग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। उनके कार्यों और उपलब्धियों को सुनकर प्रतिनिधियों का हृदय गर्व से भर उठा। यह जानकर विशेष प्रसन्नता हुई कि अनेक महिलाएँ अब अपने स्वयं के हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों का निर्माण कर स्वरोज़गार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रही हैं। उनकी कार्यकुशलता, निरंतर सीखने की भावना और बढ़ती आजीविका को वास्तव में प्रेरणादायी बताया गया।

लखपति दीदी योजना का प्रभाव
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही योजनाओं की सराहना की गई। वक्ताओं ने बताया कि ‘लखपति दीदी योजना’, महिला स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराने की पहल और आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण हेतु चलाई जा रही विभिन्न योजनाएं वास्तव में जमीनी स्तर पर उल्लेखनीय प्रभाव डाल रही हैं।

प्रोत्साहन और आभार
सेवा संकल्प फाउंडेशन (Sewa Sankalp Foundation) की ओर से महिलाओं को उपहार सामग्री भेंट कर उन्हें प्रोत्साहित भी किया गया। वक्ताओं ने महिला शक्ति के इस अद्भुत उत्साह, समर्पण और प्रगति को नमन करते हुए कहा कि कार्यशाला में महिलाओं द्वारा किए गए आत्मीय व स्नेहपूर्ण स्वागत से हृदय अभिभूत है। समस्त मातृशक्ति के इस स्नेह, सम्मान और अपनत्व के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया गया।

यह कार्यशाला उत्तराखंड की महिलाओं की बढ़ती आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता का एक मजबूत प्रमाण बनी।