ग्रहण काल में करें ये शक्तिशाली उपाय, पितृ दोष और काल सर्प योग से मिलेगी राहत

चंद्र ग्रहण को पितृ दोष और काल सर्प योग जैसे ज्योतिषीय दोषों से मुक्ति पाने के लिए एक बहुत ही शुभ और शक्तिशाली समय माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण काल में किए गए उपाय और पूजा-पाठ बहुत ही प्रभावी होते हैं।

साल 2025 का अगला चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 को लगेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा। इस दौरान आप कुछ विशेष उपाय कर सकते हैं।

-पितृ दोष से मुक्ति के उपाय

पितृ दोष पूर्वजों की असंतुष्टि या अधूरे अनुष्ठानों के कारण बनता है। चंद्र ग्रहण के दौरान इससे छुटकारा पाने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं:

  • तर्पण और पिंडदान: ग्रहण काल में अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान करें। यह उनकी आत्मा को शांति और मुक्ति देता है।
  • दान-पुण्य: किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या धन का दान करें। आप गाय को चारा खिला सकते हैं या पक्षियों को दाना डाल सकते हैं।
  • मंत्र जाप: “ॐ श्री पितृभ्यो नमः” या “ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः” मंत्र का जाप करें। यह आपके पितरों को प्रसन्न करता है।
  • पीपल की पूजा: पीपल के पेड़ में दूध, काला तिल, और जल अर्पित करें। शाम के समय पीपल के नीचे दीपक जलाएं।

-काल सर्प योग से मुक्ति के उपाय

काल सर्प योग राहु और केतु ग्रहों की विशेष स्थिति से बनता है, जो जीवन में कई तरह की बाधाएं लाता है। चंद्र ग्रहण के दौरान इससे मुक्ति के लिए आप ये उपाय अपना सकते हैं:

  • नाग-नागिन की पूजा: चांदी या तांबे के नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करें और उन्हें बहते पानी में प्रवाहित करें।
  • शिवलिंग पर अभिषेक: भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें और शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाएं।
  • मंत्र जाप: महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बहुत ही लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा, नाग गायत्री मंत्र (“ॐ नागकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्प प्रचोदयात”) का जाप भी करें।
  • हनुमान चालीसा का पाठ: प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

ग्रहण के समय इन उपायों को करते हुए पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखें। माना जाता है कि सही विधि और भाव से किए गए ये उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।