पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं के लिए रामबाण हैं ये 5 योगासन

आजकल की महिलाओं में हार्मोनल समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिसके कारण अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, मुंहासे, थकान और गर्भधारण में समस्या जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। दोनों ही स्थितियों में शरीर में हार्मोन का स्तर असामान्य हो जाता है। जिसके कारण मासिक धर्म अनियमित हो सकता है और ओव्यूलेशन में समस्या आती है। इंसुलिन का स्तर बढ़ने के कारण पीसीओएस हो सकता है। मोटापा, खराब खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी इन स्थितियों को बढ़ा सकती है। नियमित दवाओं के साथ योग इस समस्या को जड़ से ठीक करने में मददगार हो सकता है। अपनी दिनचर्या में कुछ योगासन और प्राणायाम को शामिल करके आप पीसीओएस की समस्याओं को कम कर सकते हैं और हार्मोनल संतुलन बनाए रख सकते हैं।

बद्ध कोणासन : यह आसन पेल्विक फ्लो को खोलने और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मददगार है। बद्ध कोणासन को तितली आसन कहते हैं। इसके अभ्यास से कूल्हों, जांघों और घुटनों को खोलने में मदद मिलती है, जिससे लचीलापन बढ़ता है। यह पाचन सुधारने, मासिक धर्म के दर्द से राहत दिलाने, तनाव और चिंता को कम करने के साथ ही प्रजनन प्रणाली को स्वस्थ रखने में भी सहायक है। आसन से पेल्विक एरिया में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और अंडाशय को सक्रिय करता है। इस आसन के अभ्यास के लिए जमीन पर बैठेंकर दोनों पैरों को जोड़ें और घुटनों को ऊपर-नीचे करें।

सेतुबंधासन : यह तनाव को कम करने और थायरॉइड, पीरियड्स को रेगुलेट करने में सहायक है। सेतुबंधासन को ब्रिज पोज कहते हैं जिसमें शरीर की मुद्रा एक सेतु की तरह हो जाती है। यह आसन पीठ दर्द को कम करने, मांसपेशियों को मजबूत करने और तनाव को कम करने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करता है जो गर्भावस्था और प्रसव के लिए फायदेमंद है। साथ ही हार्मोनल बैलेंस को सुधारता है और यूट्रस की मांसपेशियों को मजबूत करता है। इस आसन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और कूल्हों को ऊपर उठाएं।

बालासन : मानसिक शांति और स्ट्रेस रिलीफ के लिए बालासन श्रेष्ठ है। बालासन एक आरामदायक योगासन है जो शरीर और मन दोनों को शांत करने में मदद करता है। यह तनाव और चिंता को कम करके, पीठ दर्द से राहत दिलाने, पाचन में सुधार करने और शरीर को आराम देने में सहायक है। बालासन का अभ्यास मानसिक तनाव कम करता है जो गर्भधारण में बड़ी रुकावट है। इसके अभ्यास के लिए वज्रासन में बैठकर आगे झुकते हुए हाथ आगे फैलाएं।

धनुरासन : यह हार्मोनल संतुलन और ओवरी को एक्टिव करने में मदद करता है। धनुरासन गुर्दे की मालिश करने, उनके कार्य को उत्तेजित करने और डिटाॅक्स को बढ़ावा देने के लिए एकदम सही है। साथ ही, यह रीढ़ को मजबूत करता है और पीठ दर्द से राहत देता है। इस आसन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेटें और अपने घुटनों को मोड़ें। पीछे की ओर से अपने टखनों को पकड़ें। सांस लें और छाती और जांघों को जमीन से ऊपर उठाएं। गहरी सांस लेते हुए 15-20 सेकंड तक रुकें।

नाड़ी शोधन प्राणायाम: हार्मोन बैलेंस, मानसिक तनाव कम और इम्युनिटी सुधारने में नाड़ी शोधन प्राणायाम असरदार है। यह प्राणायाम नाड़ियों की शुद्धि के लिए किया जाता है और इसमें अनुलोम-विलोम जैसी तकनीक होती है, लेकिन यह ज्यादा ध्यान और शांति प्रदान करने वाला होता है।