जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक मॉडलिंग तकनीकों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

देहरादून। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC), देहरादून में जल संसाधनों के वैज्ञानिक एवं टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला ‘Integrated Water Resources Modeling and Basin Management Using MIKE Hydro Basin’ का शुभारंभ हुआ। 8 सितंबर 2026 तक चलने वाली इस कार्यशाला का आयोजन ICAR-IISWC, स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA), देहरादून और DHI India के संयुक्त तत्वावधान में जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के INCCC प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया जा रहा है।

कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से 400 से अधिक प्रतिभागी ऑनलाइन और ऑन-साइट हाइब्रिड मोड में शामिल हो रहे हैं। इनमें SARRA से जुड़े हाइड्रोलॉजिस्ट, GIS विशेषज्ञ, शोधकर्ता, विभिन्न शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों के संकाय सदस्य, पर्यावरण वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हैं। प्रतिभागियों की व्यापक भागीदारी जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक मॉडलिंग तकनीकों की बढ़ती आवश्यकता और उपयोगिता को दर्शाती है।

आयोजन अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक (SWCE) डॉ. अमरीश कुमार ने कहा कि आधुनिक मॉडलिंग और वैज्ञानिक डेटा आधारित तकनीकों का प्रभावी उपयोग जल संसाधनों के बेहतर नियोजन और दीर्घकालिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए नवीन तकनीकों और डेटा आधारित दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (NIH), रुड़की के पूर्व वैज्ञानिक ‘जी’ एवं अध्यक्ष डॉ. आर.पी. पांडे ने भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) में नदियों के पुनरुद्धार की रणनीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। वहीं NIH रुड़की के वैज्ञानिक ‘सी’ डॉ. अजय अहिरवार ने MIKE Hydro Basin में मॉडल सेट-अप तथा आवश्यक इनपुट डेटा तैयार करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

इस अवसर पर संयुक्त निदेशक जलागम डॉ. ए.के. डिमरी, उप निदेशक SARRA डॉ. डी.एस. रावत, संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वेंकटेश (LWME), डॉ. उदय मंडल (SWCE), डॉ. रमा पाल सहित अनेक वैज्ञानिक, विशेषज्ञ एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।