कोट्टायम। नेपाल में केरल के पर्यटकों के एक समूह के लिए स्वयंभूनाथ मंदिर में हुई महज 20 मिनट की अप्रत्याशित देरी जीवनदान साबित हुई। मंदिर में अतिरिक्त समय बिताने के कारण समूह उस समय वहां से आगे नहीं बढ़ सका, जब अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने रास्तों को तबाह कर दिया। बाद में समूह करीब छह घंटे तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंसा रहा।
कोट्टायम के तिरुवंचूर कलाथिल हाउस निवासी केएम सतीश कुमार ने बताया कि स्वयंभूनाथ मंदिर में बिताए गए अतिरिक्त 20 मिनट बेहद अहम साबित हुए। उन्होंने कहा कि यदि समूह मंदिर में नहीं रुका होता तो संभव है कि वह उस समय उस इलाके में पहुंच जाता, जब त्रिशूली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा था।
समूह 23 अगस्त को सुबह 10:45 बजे कोच्चि से रवाना हुआ था। मुंबई होते हुए वे गोरखपुर पहुंचे और वहां से सड़क मार्ग से अपनी यात्रा जारी रखते हुए 24 अगस्त को काठमांडू पहुंचे। इसके बाद 26 अगस्त की सुबह समूह मनकामना मंदिर के लिए रवाना हुआ।
सुबह करीब 7:30 बजे जब पर्यटक गल्जी बाजार पहुंचे तो उन्होंने करीब 500 मीटर दूर बह रही त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ते देखा। देखते ही देखते नदी का पानी खतरनाक स्तर तक पहुंच गया और किनारों से बाहर बहने लगा। बाढ़ के तेज बहाव में पेड़ उखड़ गए तथा वाहन और इमारतों के हिस्से भी बह गए।
बाढ़ के कारण आगे का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। जिस मार्ग से समूह को आगे जाना था, वहां कई पुल और सड़कें बाढ़ में क्षतिग्रस्त होकर बह गईं। इसके चलते पर्यटकों के सामने आगे बढ़ने का कोई विकल्प नहीं बचा और उन्हें वैकल्पिक मार्ग तलाशना पड़ा।
सतीश कुमार के अनुसार, समूह ने इसके बाद जंगलों और दुर्गम इलाकों से होकर करीब छह घंटे तक सफर किया। देर रात करीब 12:30 बजे वे चितवन के एक होटल पहुंचे। होटल कर्मचारियों ने पर्यटकों के लिए भोजन की व्यवस्था की। हालांकि, भूस्खलन के कारण आगे का मार्ग भी बंद था, जिसके चलते समूह को रात चितवन में ही रुकना पड़ा।
अगली सुबह करीब नौ बजे पर्यटकों ने अपनी यात्रा दोबारा शुरू की। सतीश कुमार ने कहा कि स्वयंभूनाथ मंदिर में बिताए गए वे 20 मिनट उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए। उन्होंने कहा कि अगर समूह वहां 20 मिनट और नहीं रुका होता तो उसे किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ सकता था।