किन्नौर ( तरंडा ), 15 फरवरी। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर के प्रवेश द्वार और नेशनल हाईवे-5 पर स्थित सुप्रसिद्ध तरंडा माता मंदिर में आज महाशिवरात्रि का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और अपनी अटूट धा र्मिक मान्यता के लिए मशहूर इस मंदिर में आज शिव और शक्ति की आराधना का अद्भुत संगम देखने को मिला।
–ब्रह्ममुहूर्त में हुआ विशेष अभिषेक
तड़के ब्रह्ममुहूर्त में ही मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। परंपरा के अनुसार, सीमा सड़क संगठन (BRO/GREF) के जवानों और स्थानीय पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माता तरंडा और भगवान शिव की प्रतिमा का गंगाजल, दूध, दही और शहद से अभिषेक किया। कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाओं के बावजूद, तड़के से ही भक्तों की लंबी कतारें मंदिर परिसर में दिखाई देने लगी थीं।
–श्रद्धा और सुरक्षा का अनूठा संगम
तरंडा माता मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ से गुजरने वाला हर वाहन चालक और सेना का जवान माता का आशीर्वाद लेकर ही आगे बढ़ता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर हाईवे से गुजरने वाले सैकड़ों ट्रक चालकों, पर्यटकों और स्थानीय ग्रामीणों ने मंदिर में रुककर शिवलिंग पर बेलपत्र और धतूरा अर्पित किया। ‘जय माता दी’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष से पूरी ट्रांडा ढांक (चट्टानी रास्ता) गुंजायमान हो उठी।
–भव्य आरती और भंडारे का आयोजन
दोपहर के समय मंदिर परिसर में भव्य शिव आरती का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय किन्नौरी वाद्य यंत्रों की गूँज ने वातावरण को दिव्य बना दिया। मंदिर समिति और सेना के सहयोग से भक्तों के लिए विशेष भंडारे (प्रसाद) की व्यवस्था की गई थी। कड़ाके की ठंड को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए गर्म चाय और फलाहार का भी प्रबंध किया गया था।
–यातायात और सुरक्षा व्यवस्था
नेशनल हाईवे पर स्थित होने के कारण, भावानगर पुलिस और होमगार्ड के जवानों ने यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में विशेष सहयोग दिया। संकरे मार्ग और भारी भीड़ के बावजूद सुरक्षा बलों ने सुनिश्चित किया कि दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं और हाईवे से गुजरने वाले वाहनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मान्यता और विश्वास
स्थानीय लोगों का मानना है कि तरंडा माता पूरे किन्नौर की रक्षा करती हैं और महाशिवरात्रि के दिन यहाँ पूजा करने से पूरे वर्ष सुख-समृद्धि बनी रहती है। शाम ढलते ही पूरा मंदिर परिसर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा, जो दूर पहाड़ियों से भी एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।
