इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के बारे में बढ़ती अनिश्चितता के बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थकों ने रावलपिंडी और इस्लामाबाद में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस बढ़ते असंतोष की आशंकाओं के मद्देनजर रावलपिंडी में धारा 144 लागू कर दी है और सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बीच रिपोर्टों से पता चला है कि इमरान खान की तीन बहनें और खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी पिछले कुछ दिनों से उनसे मिलने की अनुमति देने का दबाव बनाने के लिए अदियाला जेल के बाहर डेरा डाले हुए हैं।
पार्टी ने मंगलवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय और अदियाला जेल के बाहर नए सिरे से विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रावलपिंडी के उपायुक्त डॉ. हसन वकार चीमा ने दंड प्रक्रिया संहिता (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2024 की धारा 144 को एक से तीन दिसंबर तक के लिए लागू करने का आदेश दिया है। इस कानून के तहत पांच या पांच से अधिक लोगों की सभी सभाएं, बैठकें, धरना, रैलियां, जुलूस, प्रदर्शन, जलसे, विरोध प्रदर्शन और इसी तरह की सभाएं निषिद्ध हैं। प्रतिबंधों में हथियार, नुकीले उपकरण या कोई अन्य उपकरण ले जाना भी प्रतिबंधित है, जिसका संभावित रूप से हिंसा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कानून लागू करने वाली एजेंसियों को छोडक़र हथियारों का प्रदर्शन, आपत्तिजनक या नफरत भरे भाषण और सभाओं या यातायात पर लगाये गये प्रतिबंधों के उल्लंघन के सभी प्रयास वर्जित हैं। एक दिसंबर के आदेश में कहा गया है कि ‘रावलपिंडी जिला की सीमाओं के भीतर आसन्न खतरा’ मौजूद है और सार्वजनिक सुरक्षा एवं शांति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। श्री खान को अगस्त 2023 से कई मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में डाल दिया गया है। खान को जनवरी 2025 में भ्रष्टाचार के एक मामले में 14 साल जेल की सजा सुनाई गई थी, जो उन्हें मिली सबसे लंबी जेल अवधि है। उन पर राज्य की गोपनीय जानकारियों को लीक करने से लेकर सरकारी उपहार बेचने तक 100 से अधिक मामलों में आरोप लगाए गए हैं। श्री खान से लेकर पार्टी के समर्थकों का आरोप है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस मामले को देश में अब तक का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का मामला बताया है। पाकिस्तान में पहले भी बड़े नेताओं से जुड़े बड़े वित्तीय घोटाले सामने आ चुके हैं।
