बारिश बनी आफत: हिमाचल में 279 सड़कें बंद, मानसून से नुकसान पहुंचा एक हजार करोड़ रुपये

शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में बुधवार को भी बारिश का दौर जारी रहा। भूस्खलन, पेड़ गिरने और जलभराव की घटनाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश में इस समय 279 सड़कें बंद हैं, जबकि मानसून से होने वाले नुकसान का आंकड़ा बढ़कर एक हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कई क्षेत्रों में बिजली और पेयजल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। मौसम विभाग ने 21 अगस्त तक भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार बीते 24 घंटों में सबसे अधिक 156 मिलीमीटर बारिश हमीरपुर जिले के सुजानपुर टीहरा में दर्ज की गई। इसके अलावा बिलासपुर जिले के नैना देवी में 136 मिलीमीटर, हमीरपुर के नादौन में 128 मिलीमीटर, कांगड़ा जिले के धर्मशाला में 127 मिलीमीटर, ऊना जिले के भरवीं में 118 मिलीमीटर, कांगड़ा के गगल और पालमपुर में 111-111 मिलीमीटर तथा नगरोटा सूरियां में 90 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।

बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में नदी-नाले उफान पर हैं। जगह-जगह भूस्खलन होने से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार बुधवार सुबह तक प्रदेश में 279 सड़कें बंद थीं। इनमें मंडी जिले में सबसे अधिक 100 सड़कें प्रभावित हैं। चंबा में 83, शिमला में 26, कुल्लू में 25 और सिरमौर में 16 सड़कें बंद हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

बारिश का असर बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। प्रदेश में 310 बिजली ट्रांसफार्मर और 84 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। लाहौल-स्पीति जिले के स्पीति उपमंडल में 101 ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली आपूर्ति बाधित है। सिरमौर जिले के नाहन, पांवटा साहिब और राजगढ़ क्षेत्रों में 78 ट्रांसफार्मर ठप हैं। मंडी जिले के गोहर, सुंदरनगर, सरकाघाट और धर्मपुर क्षेत्रों में 64 ट्रांसफार्मर खराब हुए हैं। शिमला जिले के चौपाल और डोडरा-क्वार क्षेत्रों में 27 ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं।

पेयजल योजनाओं पर भी बारिश का असर पड़ा है। हमीरपुर जिले के बड़सर और भोटा क्षेत्रों में 32 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। सिरमौर जिले के संगड़ाह क्षेत्र में 23 और शिमला जिले के रामपुर, चौपाल तथा जुब्बल क्षेत्रों में 17 पेयजल योजनाएं बंद हैं।

मौसम विभाग ने बुधवार को हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार 20 और 21 अगस्त को भी प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। 22 से 25 अगस्त तक भी बारिश के आसार हैं, हालांकि इस अवधि के लिए किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की गई है।

इस बीच लाहौल-स्पीति जिले की मयाड़ घाटी में अचानक आई बाढ़ ने स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। करपट नाले और चौखंग नैनगार के गवाड़ी नाले में जलस्तर अचानक बढ़ने से भारी नुकसान हुआ है। करपट नाले पर बना पुल पूरी तरह पानी में डूब गया और गांव को जोड़ने वाला मुख्य सड़क मार्ग कट गया। बाढ़ से कृषि योग्य भूमि और फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है और सभी ग्रामीण सुरक्षित बताए गए हैं।

बाढ़ के कारण चौखंग नैनगार सड़क की बहाली का काम भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने मार्ग बहाल करने का प्रयास किया था, लेकिन दोबारा बाढ़ आने से काम रोकना पड़ा। अब मौसम में सुधार होने पर बहाली का कार्य फिर शुरू किया जाएगा। क्षेत्र की विधायक अनुराधा राणा ने प्रशासन को नुकसान का त्वरित आकलन करने और प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

मानसून से होने वाले नुकसान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश में मानसून ने 30 जून को दस्तक दी थी। तब से अब तक बारिश से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में 197 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 116 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। इसके अलावा 28 लोगों की जान पहाड़ी से गिरने या पेड़ गिरने की घटनाओं में गई है। 14 लोगों की मौत भूस्खलन से, पांच लोगों की मौत बहने से और एक व्यक्ति की मौत फ्लैश फ्लड की घटना में हुई है।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार मानसून के दौरान अब तक सार्वजनिक और निजी संपत्ति को हुए नुकसान का आंकड़ा एक हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सबसे अधिक 750 करोड़ रुपये का नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ है। जल शक्ति विभाग को 227 करोड़ रुपये की क्षति आंकी गई है। मानसून के दौरान अब तक 85 मकान, 14 दुकानें और 284 पशुशालाएं पूरी तरह ध्वस्त हुई हैं, जबकि 320 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।