दुखों का नाश करेगा रुद्राभिषेक: ज्योतिषी संजीव मिश्रा ने बताया महाशिवरात्रि पर शिव साधना और विशेष अनुष्ठान का महत्व

महाशिवरात्रि का शुभ त्योहार फाल्गुन महीने की चतुर्दशी (14वें) तिथि को मनाया जाता है। इस साल, महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे समाप्त होगी। चूंकि तिथि 15 फरवरी की शाम को शुरू हो रही है, इसलिए महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी, 2026 को मनाया जाएगा। ज्योतिषी संजीव कुमार मिश्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के लिए विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दिन रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है।

रुद्राभिषेक का धार्मिक महत्व: शास्त्रों में कहा गया है: “ऋतं दुःखं द्रावयति इति रुद्रः” अर्थात्, भगवान शिव सभी दुखों का नाश करने वाले हैं। ऐसा माना जाता है कि हमारे दुख हमारे पिछले कर्मों के कारण होते हैं। रुद्राभिषेक और रुद्राचन (रुद्र की पूजा) करने से पापी कर्म नष्ट होते हैं और भक्त के भीतर शिव तत्व का विकास होता है। रुद्रहृदय उपनिषद में कहा गया है कि भगवान रुद्र सभी देवताओं की आत्मा हैं, और शिव का रूप सभी देवताओं में मौजूद है। रुद्राभिषेक के परिणाम जल्दी मिलते हैं। यह पूजा काल सर्प दोष, घरेलू कलह, व्यापार में नुकसान और शिक्षा में बाधाओं जैसी समस्याओं से मुक्ति के लिए बहुत फलदायी मानी जाती है। रुद्राभिषेक करने के प्रमुख लाभ:

नकारात्मकता और पिछले कर्मों से मुक्ति: रुद्राभिषेक जीवन में नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है। बार-बार आने वाली बाधाएं और समस्याएं दूर होने लगती हैं। धन और करियर में स्थिरता: ऐसा माना जाता है कि अगर आपको आर्थिक समस्याएं, करियर में रुकावटें या बिज़नेस में नुकसान हो रहा है, तो रुद्राभिषेक करने से शुभ परिणाम मिलते हैं। बेहतर स्वास्थ्य और ग्रहों के दोषों से मुक्ति: यह ग्रहों के असंतुलन के कारण होने वाली मानसिक और शारीरिक समस्याओं से राहत देता है।