दिल्लीः केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र और कम आय वर्ग के लोगों को बड़ी राहत देते हुए अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार का मानना है कि जब तक देश के असंगठित क्षेत्र के बड़े हिस्से को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में पूरी तरह नहीं लाया जाता, तब तक ऐसी योजनाओं का मजबूत बने रहना बेहद जरूरी है।
योजना को मजबूत बनाने पर बढ़ेगा खर्च
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, सरकार आगे भी आउटरीच प्रोग्राम, जागरूकता अभियान, क्षमता निर्माण और अन्य विकास गतिविधियों पर खर्च करेगी।
इसके साथ ही योजना को लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए सरकारी फंडिंग सपोर्ट भी जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि इससे ज्यादा से ज्यादा लोग अटल पेंशन योजना से जुड़ सकेंगे।
9 मई 2015 को हुई थी अटल पेंशन योजना की शुरुआत
अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को की गई थी। इस योजना का उद्देश्य देश में एक “पेंशन समाज” तैयार करना है, ताकि बुजुर्गावस्था में लोगों को नियमित आय मिल सके। योजना के तहत लोग छोटे-छोटे मासिक योगदान के जरिए अपने भविष्य के लिए बचत करते हैं।
हर महीने 1,000 से 5,000 तक की गारंटीड पेंशन
अटल पेंशन योजना के तहत 60 साल की उम्र के बाद लाभार्थियों को हर महीने ₹1,000 से ₹5,000 तक की गारंटीड पेंशन मिलती है। पेंशन की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति ने कितने साल तक और कितनी राशि का योगदान किया है।
किन लोगों के लिए है यह योजना
यह योजना खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाई गई है जो किसी सरकारी या निजी पेंशन स्कीम से नहीं जुड़े होते, जैसे दिहाड़ी मजदूर, घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान, छोटे दुकानदार।
सरकार का मानना है कि यह योजना न केवल बुजुर्गावस्था में आर्थिक सुरक्षा देती है, बल्कि लोगों को सामाजिक सम्मान भी सुनिश्चित करती है।
8.66 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 19 जनवरी 2026 तक अटल पेंशन योजना से 8.66 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं।
बजट 2026 से पहले अहम माना जा रहा फैसला
सरकार का यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि बजट 2026 फरवरी में पेश किया जाना है। इससे पहले अटल पेंशन योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय असंगठित क्षेत्र और कम आय वर्ग के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
