RTI के दो दशक पूरे होने पर सीएम धामी ने 10 अधिकारियों को किया सम्मानित

देहरादून: उत्तराखंड सचिवालय में आज ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ (RTI Act) के सफल क्रियान्वयन के 20 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और सूचना का अधिकार कानून के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सूचना के अधिकार के तहत सराहनीय, त्वरित और पारदर्शी कार्य प्रणाली अपनाने वाले 5 लोक सूचना अधिकारियों तथा 5 अपीलीय अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अधिकारियों ने जनसेवा और जवाबदेही की नई मिसाल पेश की है।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा सूचना का अधिकार अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने वाला वह हथियार है जिसने शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को नई ऊँचाई दी है। इस अधिनियम ने आमजन को यह शक्ति दी है कि वे सरकारी निर्णयों और नीतियों की जानकारी प्राप्त कर सकें, जिससे प्रशासन अधिक उत्तरदायी बना है।

मुख्यमंत्री ने सुशासन के क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों को साझा करते हुए कहा, प्रधानमंत्री रेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में आज देश में डिजिटल गवर्नेंस, ई-ऑफिस, डीबीटी और जन-सुनवाई जैसे कार्यक्रमों से सुशासन की एक नई संस्कृति विकसित हुई है। राज्य सूचना आयोग में अब तक 13 लाख से अधिक आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए हैं। खुशी की बात यह है कि इनमें से अधिकांश का समाधान हो चुका है और वर्तमान में केवल 700 प्रकरण ही लंबित हैं, जो राज्य सरकार की सक्रियता को दर्शाता है। सीएम ने स्पष्ट किया कि ‘जन-जन की सरकार’ के विजन के साथ राज्य सरकार भ्रष्टाचार मुक्त और जनोन्मुखी शासन की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

समारोह में सूचना आयोग के अधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड सूचना का अधिकार लागू करने और आवेदनों के निस्तारण में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। कार्यक्रम में मुख्य सचिव, सूचना आयुक्त और शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।