कार्तिक मास को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और पुण्यकारी महीना माना जाता है। इस महीने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना बहुत ज़रूरी माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार, इन गलतियों या वर्जित कार्यों को करने से व्यक्ति को दरिद्रता का सामना करना पड़ सकता है और पुण्य फल नष्ट हो सकते हैं
धन और सौभाग्य की देवी माता लक्ष्मी की कृपा बनाए रखने के लिए कार्तिक मास में नीचे दिए गए कार्यों को करने से बचना चाहिए:
तामसिक भोजन का सेवन न करें
कार्तिक मास को सात्विक जीवन और संयम का महीना माना जाता है। दरिद्रता से बचने के लिए इन चीजों से परहेज करें:
- मांस, मछली और शराब/मदिरा: इनका सेवन पूरी तरह वर्जित है, क्योंकि इन्हें तामसिक माना जाता है।
- लहसुन और प्याज: ये भी तामसिक श्रेणी में आते हैं और पूजा-पाठ के लिए मन की शुद्धता में बाधा डालते हैं।
- कुछ दालें और सब्जियां: उड़द, मूंग, मसूर, चना दाल, मटर, बैंगन और करेला का सेवन भी इस माह में वर्जित बताया गया है।
शरीर पर तेल लगाना (मालिश)
कार्तिक मास में शरीर पर तेल लगाने से बचना चाहिए।
- अपवाद: केवल नरक चतुर्दशी (कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) के दिन ही शरीर पर तेल लगाना शुभ माना जाता है। इस एक दिन को छोड़कर, पूरे महीने तेल की मालिश से बचें।
आलस्य और दोपहर में सोना
यह महीना जप, तप और पूजा-पाठ के लिए होता है।
- सूर्योदय के बाद न सोएं: कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना (कार्तिक स्नान) और पूजा करना आवश्यक माना गया है। सूर्योदय के बाद तक सोने से पुण्य फल नष्ट होते हैं।
- दोपहर में न सोएं: दिन के समय सोना अच्छा नहीं माना जाता है।
- बिस्तर पर शयन: इस माह में भूमि (जमीन) पर शयन करने का विधान है। बिस्तर पर सोने से बचना चाहिए।
इंद्रियों पर असंयम और विवाद
यह महीना मन और इंद्रियों पर संयम रखने पर जोर देता है।
- अभद्र भाषा: किसी भी तरह के गलत या अभद्र शब्दों का इस्तेमाल न करें।
- लड़ाई-झगड़ा: घर में किसी भी तरह के विवाद या क्लेश से बचें। जहां शांति और प्रेम नहीं होता, वहां माता लक्ष्मी का वास नहीं होता।
- ब्रह्मचर्य: इस पवित्र महीने में ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना श्रेष्ठ माना गया है।
जीव हिंसा
- कार्तिक मास में किसी भी पशु-पक्षी या जीव को नुकसान पहुंचाना या उनकी हत्या करना सख्त वर्जित है। शास्त्रों में अहिंसा को विष्णु भक्ति का आधार माना गया है।
इन नियमों का पालन करने से व्यक्ति का मन शुद्ध होता है, जिससे उसे पूजा का पूरा फल मिलता है और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की कृपा से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
