देहरादून में डीएम का सख्त एक्शन: बेटों ने मां को मारा-पीटा, गुंडा एक्ट में केस दर्ज

उत्तराखंड: विधवा मां को प्रताड़ित करने वाले बेटों पर लगा गुंडा एक्ट

मां को जान से मारने की धमकी, बेटों पर गुंडा एक्ट लगा

-मां की सुरक्षा सर्वोपरि: डीएम ने कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर की कार्रवाई

देहरादून: देहरादून में एक बेहद संवेदनशील और दुखद मामला सामने आया है। एक विधवा मां ने अपने ही बेटों के खिलाफ जिलाधिकारी सविन बंसल से गुहार लगाई है। मां का आरोप है कि उसके दो बेटे नशे के आदी हैं और अक्सर पैसों के लिए उसके साथ मारपीट करते हैं, यहां तक कि जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं।

-पीड़ित मां की आपबीती

भागीरथपुरम, बंजारावाला की निवासी विजय लक्ष्मी पंवार ने जिलाधिकारी को बताया कि उनके दोनों बेटे शुभम पंवार और अक्षय पंवार नशे के लती हैं। वे घर देर रात आते हैं, गांजा, अफीम और शराब के नशे में धुत रहते हैं, और हर बार पैसे की मांग करते हैं। जब पैसे नहीं मिलते तो वे डंडों और लात-घूंसों से अपनी मां को पीटते हैं। महिला ने कहा कि अब उसे अपने बेटों से जान का खतरा है, और उसे डर है कि वे उसे घर में ही मार देंगे।

-डीएम का सख्त रुख और त्वरित कार्रवाई

डीएम सविन बंसल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने सामान्य कानूनी प्रक्रियाओं (पुलिस रिपोर्ट और वकील) को दरकिनार करते हुए, गुंडा एक्ट 1970 के तहत तुरंत कार्यवाही शुरू कर दी। यह एक असाधारण कदम है, जो दर्शाता है कि डीएम ने महिला की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

डीएम ने उसी दिन गोपनीय जांच करवाई, जिसमें पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने भी मां के आरोपों की पुष्टि की। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि बेटों को मां से दूर रखना आवश्यक है। जांच रिपोर्ट के आधार पर, डीएम ने 2 घंटे के भीतर दोनों बेटों के खिलाफ गुंडा अधिनियम के तहत वाद दर्ज कर दिया।

-फास्ट ट्रैक सुनवाई का आदेश

दोनों बेटों को नोटिस जारी कर दिया गया है। उन्हें 26 अगस्त 2025 को सुबह 10:30 बजे न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। यदि वे तय समय पर नहीं आते हैं, तो उनके खिलाफ फास्ट ट्रैक सुनवाई के तहत एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी सविन बंसल का यह कदम दिखाता है कि आम नागरिकों, विशेषकर कमजोर और शोषित वर्ग के लोगों के मामलों में प्रशासन कितना संवेदनशील और प्रभावी है। यह निर्णय न्याय में देरी को खत्म करने और पीड़ितों को तुरंत राहत दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।