देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की बारिश कहर बनकर टूटी है। राजधानी देहरादून में पिछले 24 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति है और नदियां-नाले उफान पर हैं। इस आफत की बारिश से कई हैरान कर देने वाली घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें जानवरों का बहना और पुलों का डूबना शामिल है।
नाले में बहती दिखीं गायें: शहर के बिंदाल पुल के पास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक नाला पूरी तरह से उफान पर दिख रहा है। इस तेज बहाव में गायें बहती हुई नजर आ रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, ये गायें किनारे पर बंधी थीं, लेकिन अचानक बढ़े जलस्तर और तेज बहाव के कारण बह गईं। इस घटना ने प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि मवेशियों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए थे।
पुलों के ऊपर से बह रही नदियां: देहरादून-चकराता रोड पर स्थित एक पुल के ऊपर से नदी का पानी बह रहा है। यह पुल सेलाकुई और उसके आसपास के क्षेत्रों को जोड़ता है। पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण दोनों तरफ वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। यात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस रूट पर यात्रा करने से बचें।
मौसम विभाग की चेतावनी: मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में देहरादून सहित कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने सभी संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है और आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
शहर में जलभराव की स्थिति: राजधानी के प्रमुख इलाके, जैसे राजपुर रोड, धर्मपुर, डालनवाला और अन्य निचले क्षेत्रों में घुटनों तक पानी भर गया है। इससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने में भी दिक्कतें आ रही हैं। कई घरों और दुकानों में भी पानी घुस गया है, जिससे भारी नुकसान होने की आशंका है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति का जायजा लिया है और सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आपदा राहत कार्यों में तेजी लाने और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाने के लिए कहा है। SDRF की टीमें भी विभिन्न क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।
यह आपदा की स्थिति दर्शाती है कि शहर की जल निकासी व्यवस्था कितनी कमजोर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में ऐसी ही स्थिति पैदा होती है, लेकिन प्रशासन इस पर कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पाता है।
